गजल (तू क्या जाने दर्द हमारा)
तू क्या जाने दर्द हमारा , तू तो अब बेदर्द बनी राह मे मुझको छोड़ अकेला ,जाने तू किसी ओर चली तू क्या जाने दर्द हमारा-------------------------------- आकर देख ले हाल मेरा ,असक न मेरे थमते है तेरी जुदाई को कैसे ,हम तो आज यह सहते हैं अपराध किया ना जो मैंने ,क्यों सजा सुनाकर उसकी चली तू क्या जाने दर्द हमारा ---------------------------- आती थी तू पास मेरे, इतना ही तू कहती थी तेरे बिना न जीवन है यह, मेरे लिए तू जीती थी कहां गए वो कसमे वादे ,जिनको तू अब भूल चली तू क्या जाने दर्द हमारा------------------------------- मुझको अब भी हर पल तेरी ,याद बहुत ही आती है रस्ता देखे दिल बस तेरा , और ना कुछ भी भाता है जो गुजरा ना दोष यह तेरा ,किस्मत प्रभात की रूठ चली तू क्या जाने दर्द हमारा , तू तो अब बेदर्द बनी रहा में मुझको छोड़ अकेला , न जाने तू किस और चली ...