गजल (हिन्दी) सजा को सुनाकर
सजा को सुनाकर ,तुम चल दिए हो
सांसे है बाकी पर, कफन दे दिए हो
सजा को सुनाकर ---------------------
क्या कसमे थी तेरी , क्या तेरे वादे
आए नजर ना कुछ ,तेरे इरादे
सजकर सभरकर ,तुम चल दिए हो
सांसे बाकी पर,_----------------------
यह दस्तूर कैसा, यह पैगाम कैसा
समझ में ना आए ,यह इल्जाम कैसा
मेरा फैसला यह, क्या कर दिए हो
सांसे बाकी पर ----------------------
तुमने कहा था, यह तन मन तुम्हारा
जीवन बचाया यह,जीवन तुम्हारा
फिर यह सितम,क्यों कर दिए हो
सांसे हैं बाकी पर ,कफन दे दिए हो
सजा को सुना करो तुम चल दिए हो
( प्रभात द्विवेदी)
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
Please do not spam.