गजल (मै ना मांगू कुछ भी तुझसे)

मैं ना मांगू कुछ भी तुझसे, इतना कर्म निभा जाना
 अर्थी मेरी जाए तब ,आंचल अपना दे जाना
 मैं ना मांगू कुछ भी तुझसे-----------------
        मैंने तुझसे प्यार किया था, यूं ही प्यार निभाऊंगा
         माना खुदा तुम्हें अपना, मैं पूजा करता जाऊंगा
       जब टूटने लगे सांसे मेरी, तब इतनी आश बंधा जाना
         अर्थी मेरी जाए तब -----------------------
होता है जो प्यार में वो ,मेरे साथ भी कल होगा 
आंसुओं होगे पास मेरे और ,दर्द का दामन भी होगा
 सजने लगे चिता मेरी  जब, कफन मुझे तुमसे दे जाना 
अर्थी मेरी जाए तब--------------------------
          रोएंगे कुछ लोग यहां ,कोई तो खुशी मनाएगा
         मंदिर होंगे कुछ लोग यहां ,कुछ दर्द मुझे पहुंचाएगा 
        रोए दुनिया सारी जब तब आंसू अपने ना लाना
      अर्थी मेरी जाए तब, आंचल अपना दे जाना------

                                  ( प्रभात द्विवेदी) 

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