हास्य व्यंग

क्लास में एक अध्यापिका, 
 छात्रों के समूह खड़ी है
 एक हाथ में चाक और, 
 दूसरे हाथ में पतली छड़ी है 
इसी अदा के साथ मुख पर , 
लेक्चरो की झड़ी है 
एक के बाद एक बातें सिखाते जाती है
 इसी के साथ झूठ बोलना पाप है , 
यह बताती जाती है
 तभी दरवाजे से आवाज आई, 
 माफ करना मैडम यह कहती , 
विद्यालय की नौकरानी 
अध्यापिका के पास आई 
बोली मैडम किसी ने याद किया है , 
पूछने पर कुछ ना बताया लेकिन, 
 शक्ल से दूध वाला लगा है 
इतना सुनते ही मैडम के माथे पर, 
 पसीना छलकने लगा 
पैसे का वादा किया था , 
यह मन ही मन खटकने लगा 
वक्त था कम और समस्या थी भारी , 
कुछ समझ न सकी वो वादे की हारी
तभी उसके मुंह से आवाज आई 
कह दो कि मैडम है नहीं , 
यह कहकर मैडम ने जान बचाई 
अभी राहत की एक सास , 
आ भी ना पाई थी 
कि एक छात्र उठकर बोला 
झूठ बोलना पाप है ,यह आपने कहा था 
झूठ खुद बोला आपने 
फिर क्यों आपको ना पाप लगा है

                     (प्रभात द्विवेदी) 

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