आरती (जगदंबे जगत जननी )

जगदंबे जगत जननी ,मुझ पर यह दया कर दे
 तेरे द्वारे खड़ा हूं माँ ,उद्धार मेरा कर दे 
जगदंबे जगत जननी ----------------
        तेरा द्वार है पावन माँ ,तू जग की है माता 
        तेरी शरण में आता जो ,वह दुख न कोई पाता
        माँ लेकर शरण मुझको , उद्धार मेरा कर दे 
          जगदंबे जगत जननी -----------------------
जब भी कोई माँ को बुलाता , माँ तू तो आती है 
माँ बनकर सब का तो , तू दर्द मिटाती है 
माँ दर्द के आंसू अब, मेरे भी माँ हर दें
 जगदंबे जगत जननी ---------------------
            प्रभात का दिल माता,बस यह ही कहता है 
            चरणों से ना दूर करो ,विनती यह करता है 
            माँ शरण में बस रखना ,इतनी तो दया कर दे 
            जगदंबे जगत जननी ,मुझ पर यह दया कर दे 
           तेरे द्वार खड़ा हूं मां ,उद्धार मेरा कर दे-------

                                    (प्रभात द्विवेदी) 

                                           

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