गजल (हिन्दी) जीवन का तक़दीर से रिश्ता

जीवन का तकदीर से रिश्ता, देखो कैसे छूट गया 
मैंने जिसको जितना चाहा ,वो ही मुझसे रूठ गया 
जीवन का तकदीर से रिश्ता 
         खता हुई क्या मुझसे ऐसी ,मैं तो जान न पाया था 
        क्यों इतने इल्जाम मिले ,मैं यह समझ ना पाया था 
         जीता था जो मेरे खातिर ,वो ही नजरें फेर गया है 
         जीवन का तकदीर से रिश्ता देखो -----------------
 कल तक मेरी खातिर जो ,अपना वक्त बिताते थे
 मेरे लिए वो जीते थे ,और मुझ पर जान लुटाते थे 
आज वही इंसान तो देखो, मेरा सब कुछ लुट गया 
जीवन का तकदीर से रिश्ता देखो ------------------
        कहता था वह कल तक मुझसे, यह जीवन बस तेरा है
       पत्थर से इंसान बनाया ,सब कुछ बस अब तेरा है 
    फिर क्या पल में ऐसा हुआ, जो कफन उड़ा कर चला गया        जीवन का तकदीर से रिश्ता--------------------------
 कसमे वादे सारे रिश्ते ,उसको याद ना आते हैं
 नजरें फेर कर बैठा ऐसा ,अब हम नजर ना आते हैं 
खुशियां मुझको देने वाला ,अश्क से रिश्ता जोड़ गया
 जीवन का तकदीर से रिश्ता ------------------------
 मैंने जिसको जितना चाहा वो ही मुझसे रूठ गया

                                ( प्रभात द्विवेदी

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

Please do not spam.

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

आरती (जगदंबे जगत जननी )

भक्ति गीत (हिन्दी) मेरे भोले भण्डारी

गजल (तू क्या जाने दर्द हमारा)