गजल (हिन्दी) फूलो पर वो चले

फूलों पर वो चले बस, इतना ही मैं कहूंगा
 उनकी खुशी के खातिर, हर गम को मैं सहूगा
 फूलों पर वो चले बस ------------------------
            बेदर्दी बेवफा है ,फिर भी तो वह खुदा है 
            उसने ना चाहा मुझको, उसकी तो यह जुबा है
            ना गुजरे उस पर ऐसा , बस यह दुआ करूंगा 
            फूलों पर वह चले बस----------------------  
अपनी खुशी की खातिर ,इल्जाम  हर लगाया 
कल तक के थे जो पराये,दिल से उन्हें लगाया 
दिल उनका ना अब टूटे , यह ही सदा कहूंगा 
फूलों पर वो चले बस ---------------------------
           रोता हूं और सिसकता ,फिर भी न दिल कुछ कहता
           महफिल सजे तुम्हारी , दिल हर पल यह ही कहता 
           ना असक  एक आये,  दिल से दुआ करूंगा 
           फूलों पर वो चले बस-----------------------
जाता हू  जग से अब  तो, ना शिकवा कोई होगी 
अपनों के साथ रहना ,अब तो ना बात होगी
 तुम तो ना गम अब करना ,अब तो ना मैं मिलूंगा 
फूलों पर वो चले बस इतना ही मैं कहूंगा-------

                                  (प्रभात द्विवेदी) 

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