गजल (तू क्या जाने दर्द हमारा)

तू क्या जाने दर्द हमारा , तू तो अब बेदर्द बनी
राह मे मुझको छोड़ अकेला ,जाने तू किसी ओर चली 
तू क्या जाने दर्द हमारा--------------------------------
       आकर देख ले हाल मेरा ,असक न मेरे थमते है
         तेरी जुदाई को कैसे ,हम तो आज यह सहते हैं
    अपराध किया ना जो मैंने ,क्यों सजा सुनाकर उसकी चली
       तू क्या जाने  दर्द हमारा ----------------------------
आती थी तू पास मेरे, इतना ही तू कहती थी
 तेरे बिना न जीवन है यह, मेरे लिए तू जीती थी
 कहां  गए वो कसमे वादे ,जिनको तू अब भूल चली 
तू क्या जाने दर्द हमारा-------------------------------
     मुझको अब भी हर पल तेरी ,याद बहुत ही आती है 
      रस्ता देखे दिल बस तेरा , और ना कुछ भी भाता है 
     जो गुजरा ना दोष यह तेरा ,किस्मत प्रभात की रूठ चली
     तू क्या जाने दर्द हमारा , तू तो अब बेदर्द बनी
    रहा में मुझको छोड़ अकेला , न जाने तू किस और चली
                                (प्रभात द्विवेदी) 

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

Please do not spam.

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

आरती (जगदंबे जगत जननी )

भक्ति गीत (हिन्दी) मेरे भोले भण्डारी