गजल (हिन्दी) तोहफा मोहब्बतों का

तोहफा मोहब्बतो का ,मेरे यार क्या दिया है
 चाहा था मैंने तुमको  तूने गम है क्यों दिया है 
तोहफा मोहब्बत का ----------------------------
           मांगा ना मैंने कुछ भी ,एक पल का साथ मांगा 
           एक बार तो तू कह दे , मैंने है तुमको चाहा
           हर पल में आज तड़पा  तूने काम वह किया है 
           तोहफा मोहब्बतों का------+----------------
 दुनिया में था अकेला, पर साथ तेरा पाया 
ठोकर लगी इस दिल को, पर तुमको न भूल पाया 
भूला है क्यों तू मुझको, क्यों दर्द यह दिया है 
तोहफा मोहब्बतों का----------------------------
           हर पल मै साथ था फिर, वक्त क्यों यह आया 
           मुझसे हुई खता क्या ,मैं जान ना यह पाया 
           हंस-हंसकर यूं रुलाया ,तूने प्यार यह दिया है
            तोहफा मोहब्बतों का --------------------------
 हर पग पर मैंने तेरे, इस दिल को था बिछाया 
अफसोस बस इतना ,पहचान तू ना पाया 
अब तक मिला ना गम जो,  तूने गम वह अब दिया है 
तोहफा मोहब्बतों का मेरे यार क्या दिया है--------

                                  ( प्रभात द्विवेदी) 

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