गजल (हिन्दी) कोई जाकर के उनसे अब कह दो

कोई जाकर के उनसे अब कह दो ,अर्थी काधो पर जा रही है 
अरमान उनका अब पूरा हुआ है ,खुशियां मिलने उन्हें जा रही हैं
 कोई जा करके उनसे अब कह दो -------------------------
भार सिंदूर का था जो अब तक  ,आगे उनको ना धोना पड़ेगा     चुभन माथे पर बिंदी की थी , दर्द उसका न सहना पड़ेगा
 चूड़ी रख दो हाथों से अब तो  ,खनक मिटने अब जा रही है कोई जा करें कि उनसे अब कह दो-------------------------
 प्यार की ना अब सौगात होगी ,अरमा कोई ना मेरा सजेगा मेरा क्या है हक तुम पर अब  ,कफन मेरा न सर से हटेगा
 सात फेरों का बंधन अब टूटा  इससे मुक्ति मिली जा रही है कोई जाकर के उनसे अब कह दो ,अर्थी काधों पर जा रही है अरमा उनका पूराहुआ है  खुशियां मिलने उन्हें जा रहे हैं

                                     (प्रभात द्विवेदी) 

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

Please do not spam.

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

गजल (तू क्या जाने दर्द हमारा)

आरती (हिन्दी) दया कर दो प्रभु मुझ पर

आरती (जगदंबे जगत जननी )