गजल Gazal (हिंदी)। रिश्ता यह दर्द का ।
यह दर्द का क्यों ,मैंने है तुमसे पाया
तुम हो गए पराए ,मैं जान भी ना पाया -२
रिश्ता है दर्द का क्यों.......................
थी जो खता हमारी ,मुझको तो यह बताते
थी जो कसम तुम्हारी ,एक बार उसको लाते -२
मन में क्या आया तेरे ,मैं तो समझ न पाया
रिश्ता यह दर्द का क्यों ........................
विस्वास को हमारे ,किसकी नजर लगी है
रोता हूं हर पल मै तू ,हंसती हुई खड़ी है -२
क्या पाया जग में ऐसा ,मैं तो न जान पाया
रिश्ता यह दर्द का क्यों ...........................
किस्मत का खेल है ऐसा, जिसमें तो मै फसा हूं
इल्जाम है हजारों ,माथे पर ले खड़ा हूं -२
क्या दोष है हमारा ,अब तक न जान पाया
रिश्ता यह दर्द का क्यों .........................
तू खुश रहे सदा ही, जीवन भर यह कहूंगा
जाता हूं जग से तेरे ,अब फिर ना मैं मिलूंगा -२
तकदीर का यह रिश्ता, प्रभात जान न पाया
रिश्ता यह दर्द का क्यों ,मैंने है तुमसे पाया
तुम हो गए पराए मैं जान भी ना पाया -२
-प्रभात द्विवेदी
Wow
जवाब देंहटाएंBhut Sundar
जवाब देंहटाएं😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😉😉😉
जवाब देंहटाएंNice
जवाब देंहटाएंWow
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