गजल Gazal (हिंदी)। रिश्ता यह दर्द का ।

 यह दर्द का क्यों ,मैंने है तुमसे पाया 
 तुम हो गए पराए ,मैं जान भी ना पाया  -२
रिश्ता है दर्द का क्यों....................... 
      थी जो खता हमारी ,मुझको तो यह बताते 
      थी जो कसम तुम्हारी ,एक बार उसको लाते -२ 
      मन में क्या आया तेरे ,मैं तो समझ न पाया 
      रिश्ता यह दर्द का क्यों ........................ 
विस्वास को हमारे ,किसकी नजर लगी है 
रोता हूं हर पल मै तू ,हंसती हुई खड़ी है -२
क्या पाया जग में ऐसा ,मैं तो न जान पाया 
रिश्ता यह दर्द का क्यों ........................... 
        किस्मत का खेल है ऐसा, जिसमें तो मै फसा हूं 
        इल्जाम है हजारों ,माथे पर ले खड़ा हूं -२
        क्या दोष है हमारा ,अब तक न जान पाया 
        रिश्ता यह दर्द का क्यों ......................... 
तू खुश रहे सदा ही, जीवन भर यह कहूंगा 
जाता हूं जग से तेरे ,अब फिर ना मैं मिलूंगा -२
तकदीर का यह रिश्ता, प्रभात जान न पाया 
रिश्ता यह दर्द का क्यों ,मैंने है तुमसे पाया
तुम हो गए पराए मैं जान भी ना पाया -२
                                       
                                         -प्रभात द्विवेदी

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